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  • गरीबी दूर करनी है तो हम से सीखे

    मैं। एक भारतीय होने के नाते अपनी भारत सरकार के आगे अपने विचार रखना चाहता अगर वो देश को उनती की और ले जाना चाहते है तो.....

    देश मैं जितनी भी प्राइवेट कंपनी है उनको सरकार अपने अधिकार मैं ले। हर विय्कती जो इन लाला साही कंपनी मैं काम कर रहे है उनकी तन्कहा भी सरकारी माप डंडो के अनुसार हो। सरकार अपने सभी करमचारियों को हर साल महंगाई भता देती है। पर इन लाला साही कंपनी मैं तन्काह अपने हिसाब से दी जाती है। सरकार ने बहूत नियम बनाये है इन कंपनी के लिए भी। सिर्फ वो नियम किताबो मैं ही रह जाते है। सरकारी ऑफिसर जिन को सरकार ने इन कम्पनी के नियमो की देख रेख के लिए रखा है। वो सरकार को ही चुना लगा रहे है। उन लोगो की चांदी हो राखी है। सरकार भी तन्काह दे रही है। वो वो कंपनी जो उनके अधिकार मैं है वह से भी मोटी मार मार रहे है।

    मैं इस बात से हारान हु की जहा सरकार एक चतुर्थी वर्ग के अधिकारी को १०००० तन्कहा दे रही है। वही इन कंपनी मैं २०००-२५०० तक तन्काह मिलती है।

    बहूत ही शर्म की बात है यह सरकार के लिए। जो एक और तो गरीबी ख़तम करने का दावा करती है। वही दूसरी और गरीबो का खून चूस रहे इन प्राइवेट कंपनी के मालिको के लिए सरकार के पास कोई कानून नहीं है। आखिर कानून हो भी क्यों इन के सहारे ही तो इन नेता लोगो की सरकार चलती है। आखिर पापी पेट का सवाल है भाई।

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