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  • जुर्म ख़तम करना है तो हम से सीखो !

    भारत मैं जुर्म करना शातिर लोगो के लिए एक खेल सा है। क्यों की हर वो इंसान जो जुर्म करता है वो अछी तरह जनता है की यह भारत है। यहाँ बड़े से बड़ा जुर्म भी पैसे की आढ़ मैं छुपाया जा सकता है। ना जाने हर आए दिन कितने जुर्म होते है जिन का कोई हिसाब नही है। कितने कतल होते है, कितने रेप होते है। जिन मैं से आधे मामले पुलिस तक पहुचते है। उसके बाद शुरु होता है पुलिस का कहर। पुलिस भी पीड़ित पक्ष पर ही अपना दबाव डालती है, और पैसा ले कर उन लोगो को समझोता करने पर मजबूर कर देती है। कुछ लोग हार कर समझोता कर लेते है। कुछ हार कर शांत हो जाते है।

    भारत का सिस्टम तोबा तोबा......

    कुछ लोग यह सोच कर अदालत मैं जाते है की शायद उन को वहा पर न्या मिल जाएगा। पर होता बिल्कुल उल्टा है। सुनवाई पे सुनवाई, करते करते पता चलता है १०-१५ साल बीत गए। तब तक आरोपी की मौत हो चुकी होती है। यह फ़िर वो इंसान जो यह सोच कर अदालत मैं जाता है उसको नाय मिलेगा वो पूरी तरह कंगाल हो चुका होता है वकील की फीस दे दे कर। अंत मैं होता कुछ नही। अपराधी को सजा मिल भी जाती है तो कुछ दिनों बाद वो बेल पे छूट जाता है।

    अगर सरकार चाहती है की जुर्म को ख़तम करना है तो। तो सरकार को जुर्म करने वाले लोगो को ख़तम करना पड़ेगा। ताकि सभी लोगो को सबक मिल सखे। इन मामलों मैं मुस्लिम देश का कानून बहूत अच्छा है। जहा जुर्म करने वाले लोगो को सरे आम फांसी पे लटका दिया जाता है। भारत मैं भी ऐसा ही कानून होना चाहिये। तब कही जा कर जुर्म ख़तम होगा।

    ऐसे नेता लोग जो गरीब जनता के पैसे हड़प कर रहे है उनको सरे आम फांसी पे लटका देना चाहिये, बीच चोराए पे साड़ी जनता के सामने गोली मार देनी चाहिये ऐसे भ्रष्टाचारी लोगो को। अगर देश मैं ऐसा कानून बन जाए तो मेरा मानना है की भारत जैसा देश भी सुधर जाएगा। हर वो इंसान जो खुले आम जुर्म करता है, जुर्म करने से पहले उस के अंजाम के बारे मैं सोचेगा।

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